जिनका जन्म अवंतिका पूरी उज्जैन में हुआ है जो की सिंहपूरी क्षेत्र में निवास करते है जिन पर भगवान गणपति की असीम कृपा एवं गुरुदेव के आशीर्वाद से वेद , शास्त्र एवं ज्योतिष में पूर्ण रूप से पारंगत है एवं महामृत्युंजय अनुष्ठान , कालसर्प पूजन, मंगल भात पूजन, महागणपति अनुष्ठान एवं यज्ञ वास्तु शांति पूजन इनके द्वारा किया जाता है |
विशेष:- माँ कात्यायनी के अनुष्ठान के द्वारा असंख्य जातको (पुरुष/ महिला ) का विवाह सिद्ध करवाया गया है|
हमारे द्वारा मध्य भारत व दक्षिण भारत पद्धति के द्वारा जन्म पत्रिका का मिलाना एवं पत्रिका का फलादेस सटीक किया जाता है एवं विशेष परिस्थिथियो में भविष्य वाणी की जाती है जो की सिद्ध हुई है |
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यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकांलेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकांलेश्वरमहादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है।
पुराणों में उल्लेख मिलता है कि उज्जैन में शिप्रा नदी के तट के पास स्थित भैरव पर्वत पर मां भगवती सती के ओष्ठ गिरे थे। कहते हैं कि हरसिद्धि का मंदिर वहां स्थित है जहां सती के शरीर का अंश अर्थात हाथ की कोहनी आकर गिर गई थी। अत: इस स्थल को भी शक्तिपीठ के अंतर्गत माना जाता है। इस देवी मंदिर का पुराणों में भी वर्णन मिलता है।
उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थापित इस मंदिर में शिव अपने भैरव स्वरूप में विराजते हैं. यूं तो भगवान शिव का भैरव स्वरूप रौद्र और तमोगुण प्रधान रूप है. मगर कालभैरव अपने भक्त की करूण पुकार सुनकर उसकी मदद के लिए दौड़े चले आते हैं. काल भैरव के इस मंदिर में मुख्य रूप से मदिरा का ही प्रसाद चढ़ता है |